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अपनी आत्मकथा को पूर्ण करने में लगे पूरे आठ वर्ष – सीमा कपूर जी

प्रख्यात लेखिका, रंगकर्मी एवं निर्देशिका सीमा कपूर जी की आत्मकथा ( यूँ गुज़री है अब तलक ) का भव्य लोकार्पण सम्पन्न* ।

 

 

• *आदरणीय श्री उदय प्रताप सिंह जी ( वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार* ) , *डॉ. रति शंकर त्रिपाठी ( अध्यक्ष , भारतेन्दु नाट्य* *अकादमी* ) , *स्वामी ओमा द अक् ( संस्थापक , अक् ) , डॉ. उमेश गौतम* ( *महापौर , बरेली ) डॉ. तनु जैन ( सीईओ , बरेली छावनी बोर्ड )* *ने किया पुस्तक का लोकार्पण।*

• *सीमा कपूर जी ने बताया कि अपनी आत्मकथा ( यूँ गुज़री है अब तलक ) को पूर्ण करने में उन्हें पूरे आठ वर्ष लगे। यह कृति उनके जीवन के संघर्ष, अनुभव, संवेदनाओं और अथक समर्पण का जीवंत दस्तावेज़ है।*

* *अतिथियों का स्वागत माला और शॉल से माल्यार्पण कर और शॉल द्वारा* *हितेश अक*, *डॉ. अर्चना दीक्षित*, *अमित श्रीवास्तव **और* **साकिब भारत* *द्वारा किया गया। और स्वागत भाषण संस्था के संस्थापक* **हितेश अक* *द्वारा दिया गया और धन्यवाद ज्ञापन* *’हम भारत अभियान’* *के* *अध्यक्ष* **साकिब भारत** *द्वारा दिया गया** । *कार्यक्रम का संचालन डॉ अनीता सहगल द्वारा किया गया।*

*लखनऊ, 14 जुलाई 2026* ।

*भारतीय रंगमंच, साहित्य एवं सिनेमा जगत की प्रतिष्ठित हस्ती सीमा कपूर जी की आत्मकथा ( यूँ गुज़री है अब तलक ) का भव्य लोकार्पण मंगलवार को होटल हिल्टन गार्डन , गोमती नगर, लखनऊ में सम्पन्न हुआ।* क्लब स्पिरिचुअल बाय अक् के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में साहित्य, कला, संस्कृति एवं सामाजिक क्षेत्र की अनेक विशिष्ट हस्तियों ने सहभागिता की।

 

*समारोह में आदरणीय श्री उदय प्रताप सिंह जी ( वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार* ) , *डॉ. रति शंकर त्रिपाठी ( अध्यक्ष , भारतेन्दु नाट्य* *अकादमी* ) , *स्वामी ओमा द अक् ( संस्थापक , अक् ) , डॉ. उमेश गौतम* ( *महापौर , बरेली ) डॉ. तनु जैन ( सीईओ , बरेली छावनी बोर्ड ) सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से पुस्तक का लोकार्पण किया* ।

 

**सीमा कपूर जी ने कहा कि* , ( *यूँ गुज़री है अब तलक* ) केवल मेरी आत्मकथा नहीं, बल्कि मेरे जीवन के संघर्ष, रिश्तों, रंगमंच, सिनेमा और साहित्य की यात्रा का सच्चा दस्तावेज़ है। मैंने अपने जीवन के अनुभवों को पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ इस पुस्तक में दर्ज किया है। इस पुस्तक को लिखने और पूर्ण रूप देने में मुझे पूरे आठ वर्ष लगे। इस दौरान मैंने जीवन के अनेक उतार-चढ़ावों, स्मृतियों और अनुभवों को आत्ममंथन के साथ शब्दों में पिरोया है। यदि मेरी यह कृति पाठकों को जीवन की चुनौतियों का सकारात्मक दृष्टिकोण से सामना करने की प्रेरणा देती है, तो मेरा लेखन सार्थक होगा।

*आदरणीय श्री उदय प्रताप सिंह जी , वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार* ने कहा कि, सीमा कपूर की यह कृति आत्मकथा की पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर एक संवेदनशील जीवन-दस्तावेज़ के रूप में सामने आती है। इसमें संघर्ष, संवेदना, आत्मविश्वास और रचनात्मकता का सशक्त समन्वय दिखाई देता है।

*डॉ.* *रति शंकर त्रिपाठी , अध्यक्ष , भारतेन्दु नाट्य अकादमी* ने कहा* कि, रंगमंच और साहित्य दोनों क्षेत्रों में सीमा कपूर का योगदान उल्लेखनीय रहा है। उनकी यह पुस्तक आने वाली पीढ़ी के रंगकर्मियों और साहित्यकारों के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत बनेगी।

*स्वामी ओमा द अक् , संस्थापक , अक् ने कहा कि,* साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज और जीवन को दिशा देने का माध्यम है सीमा कपूर की यह कृति आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच और जीवन मूल्यों को सशक्त रूप से प्रस्तुत करती है और सारे अतिथियों को पुस्तक भेट की जो की सीमा जी द्वारा लिखी थी उनकी आत्मकथा ( यूँ गुज़री है अब तलक )।

*डॉ. उमेश गौतम , महापौर ,बरेली* ने कहा कि, समाज को ऐसे साहित्य की आवश्यकता है जो नई पीढ़ी को संघर्ष, संस्कार और आत्मविश्वास का संदेश दे। ‘यूँ गुज़री है अब तलक’ निश्चित रूप से इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कृति सिद्ध होगी।

* *डॉ. तनु जैन सीईओ , बरेली छावनी बोर्ड * ने* कहा कि, सीमा कपूर ने अपने जीवन के अनुभवों को अत्यंत सहज, संवेदनशील और प्रेरणादायी शैली में प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं को अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा देगी।

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने पुस्तक को एक प्रेरणादायी जीवन-दस्तावेज़ बताते हुए सीमा कपूर के साहित्य, रंगमंच एवं कला जगत में योगदान की सराहना की। समारोह में साहित्यकार, कलाकार, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, एवं बड़ी संख्या में पुस्तक प्रेमियों की उपस्थिति रही।

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