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आज़मगढ़ में ‘कमल’ खिलाने के लिए बाहुबली रमाकांत के सामने BJP फिर ‘शरणागत’!

2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने आज़मगढ़ की सभी 10 सीटों पर क्लीन स्वीप किया. BJP ने अपने एकमात्र विधायक अरुण कांत यादव का टिकट इस आधार पर काट दिया था कि उनके पिता और बाहुबली रमाकांत यादव को सपा ने अपना विधानसभा प्रत्याशी बनाया था. लेकिन, अब पिता सपा से जीतकर विधायक बन गए हैं, तो BJP ने बेटे को MLC का टिकट दे दिया है. क्या है बाहुबली रमाकांत के बेटे पर BJP के दांव की ये इनसाइड स्टोरी?

चुनावी इतिहास में पूर्वांचल की आज़मगढ़ सीट पर कमल की फसल और जीत की डगर हमेशा से बहुत मुश्क़िल रही है. आज़मगढ़ लोकसभा का चुनाव हो या इसी ज़िले की फूलपुर पवई विधानसभा का चुनाव, BJP जीत का सेहरा तभी पहन पाई, जब चेहरा बाहुबली रमाकांत यादव बने या उनके बेटे अरुणकांत यादव. BJP ने 2017 के चुनाव में यहां जीती गई एकमात्र विधानसभा सीट फूलपुर पवई अरुण कांत यादव को टिकट देकर जीती थी. लेकिन, इस बार समाजवादी पार्टी ने यहां BJP का चुनावी खेल और सियासी समीकरण बिगाड़ दिया था. अखिलेश यादव ने फूलपुर पवई विधानसभा से अरुण कांत के पिता और बाहुबली नेता रमाकांत यादव को टिकट दे दिया.

BJP जानती थी कि रमाकांत के सामने वो ये सीट किसी भी सूरत में नहीं जीत सकती. क्योंकि वोट गणित और आजमगढ़ संसदीय क्षेत्र से लेकर फूलपुर पवई तक रमाकांत और उनके परिवार ने ही BJP की जीत का पहला दरवाज़ा खोला था. लिहाज़ा BJP बैकफुट पर आ गई. तमाम मंथन के बाद उसने यहां से बाहुबली रमाकांत के बेटे अरुण कांत यादव का टिकट काट दिया. सूत्रों का दावा है कि विधानसभा चुनाव में अरुण कांत पिता के लिए प्रचार करते नज़र आए. ख़बर तो ये भी है कि BJPविधायक रहे अरुण कांत ने सपा के टिकट पर लड़ रहे पिता रमाकांत के लिए BJP प्रत्याशी रामसूरत राजभर का भी विरोध किया था. रमाकांत जीत भी गए. अब पिता सपा से विधायक हो गए, तो BJP ने बेटे के ज़रिये यहां दूसरा दांव चला.

अरुणकांत के ज़रिये रमाकांत समर्थकों का साथ चाहती है BJP?

BJP ने फूलपुर पवई सीट पहली बार जीतने वाले अरुणकांत का टिकट 2022 में इस बुनियाद पर काटा गया कि पार्टी कार्यकर्ताओं में ग़लत संदेश जा सकता है. क्योंकि, तब ये चुनावी लड़ाई ना होकर घर की लड़ाई बन जाती. हालांकि, BJP ने अपने विधायक अरुणकांत का टिकट इसलिए काटा था, क्योंकि वो जानती थी कि बाहुबली रमाकांत के मैदान में होने से वो ये सीट नहीं जीत सकती. इसीलिए, उनके बेटे अरुण कांत को टिकट नहीं दिया गया. अगर ऐसा हो जाता, तो BJP विधायकी के साथ-साथ MLC वाला दरवाज़ा भी बंद कर लेती. लेकिन, संगठन ने अरुणकांत को पहले ही इशारा कर दिया था कि वो उन्हें MLC का टिकट देगी. वही हुआ भी. अब राजनीतिक हलकों में ये चर्चा आम है कि BJP इस उम्मीद में है कि जिस तरह उसने रमाकांत यादव के सामने उनके बेटे को ना उतारकर अघोषित तौर पर उनकी मदद की थी, उसके बदले में रमाकांत यादव भी MLC चुनाव जीतने में अपने बेटे और BJP प्रत्याशी अरुणकांत यादव की अघोषित तौर पर मदद करेंगे.

इन चर्चाओं के पीछे तर्क भी है. सपा से लेकर BJP तक सबको ये मालूम है कि आज़मगढ़ की ज़िला पंचायत में बाहुबली रमाकांत यादव की स्थिति काफ़ी मज़बूत है. इसके अलावा ग्राम प्रधानों से लेकर ब्लॉक प्रमुख तक हर स्तर पर उनसे जुड़े लोग निर्णायक स्थिति में हैं. ऐसे में BJP ने बाहुबली रमाकांत के नाम और उनके बेटे अरुणकांत के चेहरे पर आज़मगढ़-मऊ विधान परिषद सीट पर जीत हासिल करने की रणनीति बनाई है. क्योंकि, विधान परिषद के 100 में से 38 सदस्यों को विधायक चुनते हैं, जबकि 36 सदस्यों को स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र के तहत जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और नगर निगम तथा नगरपालिका के निर्वाचित प्रतिनिधि चुनते हैं. इन्हीं 36 MLC प्रत्याशियों के लिए टिकट बांटे गए हैं. वहीं, समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर अपने पिछली बार के प्रत्याशी और मौजूदा MLC राकेश सिंह गुड्डू पर दांव लगाया है. पिछली बार राकेश सिंह गुड्डू MLC की सीट जीत चुके हैं. हालांकि, पार्टी के अंदर और बाहर कई वजहों से उनका विरोध हो रहा है. अब बाहुबली रमाकांत यादव के सामने ये चुनौती है कि वो अपनी पार्टी की जीत पक्की करने में मदद करें या बेटे की जीत मेें अघोषित भूमिका निभाकर परिवार की राजनीतिक प्रतिष्ठा बचाएं.

बाहुबली रमाकांत और BJP का क्या है नाता?

1985 में पहली बार रमाकांत यादव बाबू जगजीवन राम वाली कांग्रेस पार्टी के बैनर से लड़े और विधायक बने. फिर अगले ही चुनाव में 1989 में उन्होंने BSP का दामन लिया और दोबारा जीते. इसके बाद 1991 में जनता पार्टी के साथ हो लिए और तीसरी बार विधानसभा पहुंचे. चौथी बार विधायक बनने के लिए रमाकांत यादव ने साइकिल की सवारी कर ली और सपा के टिकट पर 1993 में चुनाव जीतकर विधायक बने. सपा ने उनकी राजनीतिक क्षमता और क्षेत्र में दबंगई का बड़ा इनाम दिया. 1996 में उन्हें पहली बार आज़मगढ़ लोकसभा से टिकट दिया. वो चुनाव जीत गए. इसके बाद अगले ही लोकसभा चुनाव में रमाकांत यादव ने हाथी की सवारी कर ली. 1999 में आज़मगढ़ लोकसभा से BSP के टिकट पर लड़े और जीते. अब तक ये साफ हो गया था कि बाहुबली रमाकांत यादव के नाम और चेहरे पर वोट मिलता है. 2004 में उन्होंने एक बार फिर आज़मगढ़ लोकसभा से BSP के टिकट पर जीतकर इस बात को एक बार फिर साबित कर दिया.

लेकिन, 2009 में BJP ने आज़मगढ़ लोकसभा में सपा और BSP को उन्हीं के दांव से मात देने की रणीनीति बनाई. बाहुबली रमाकांत यादव को BSP से तोड़ लिया और आज़मगढ़ लोकसभा से चुनाव मैदान में उतारा. रमाकांत ने भी अपनी सियासी ताक़त का एहसास कराया और आज़मगढ़ लोकसभा में पहली बार BJP का खाता खोल दिया. इसके बाद 2014 में आज़मगढ़ लोकसभा से BJP ने दोबारा उन पर बाज़ी लगाई, लेकिन इस बार मुलायम सिंह यादव सामने थे. रमाकांत यादव लड़े और दूसरे नंबर पर रहे. इसके कुछ समय बाद रमाकांत यादव और BJP दोनों का एक-दूसरे से मोहभंग हो गया. लेकिन 2017 में BJP ने रमाकांत के बेटे अरुणकांत को उनके पिता की विधानसभा सीट फूलपुर पवई से टिकट दिया. अरुणकांत ने भी BJP के लिए जीत का आग़ाज़ किया.

परिवार या पार्टी किसे बचाएंगे बाहुबली रमाकांत?

BJP के लिए आज़मगढ़ में अब खोने के लिए कुछ भी नहीं है. जो था वो रमाकांत यादव के रूप में पहले ही खो चुकी है. क्योंकि, अब तक आज़मगढ़ लोकसभा सीट पर उसे जो एकमात्र जीत मिली थी, वो रमाकांत यादव ने दिलाई थी और फूलपुर पवई विधानसभा में अब तक इकलौती जीत उनके बेटे अरुणकांत के ज़रिये BJP की झोली में आई थी. अब 2022 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर रमाकांत यादव ने सपा के टिकट पर फूलपुर पवई से जीत हासिल कर ली है, वहीं अरुणकांत यादव जो कि 2007 में सपा के टिकट पर फूलपुर पवई से विधायक चुने गए थे, वो अब MLC प्रत्याशी के रूप में BJP के लिए नाक का सवाल और सपा के लिए सियासी साख का विषय बन चुके हैं.

BJP के पास आज़मगढ़-मऊ सीट पर अपनी जीत पक्की के लिए ज़्यादा विकल्प नहीं हैं, जबकि सपा के रमाकांत यादव के इशारे पर खेल बन या बिगड़ सकता है. ऐसे में रमाकांत यादव के होते हुए अगर MLC की ये सीट सपा हारती है, तो उनके बाहुबल का साम्राज्य बिखर जाएगा और अगर सपा जीतती है तो वो अपने बेटे की हार के ज़िम्मेदार होंगे. इसलिए, BJP ने अरुणकांत को MLC का टिकट देकर बाहुबली रमाकांत के घर में राजनीतिक धर्मसंकट खड़ा कर दिया है. क्योंकि, BJP को आज़मगढ़ लोकसभा में रमाकांत और फूलपुर पवई में अरुणकांत ने एक-एक बार जीत दिलाई है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि BJP का ये ‘माइंडगेम’ आज़मगढ़-मऊ MLC सीट पर कमल खिला पाएगा या साइकिल के सामने मुरझा जाएगा.

Lahar Ujala

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