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वीर सावरकर के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता : योगी आदित्यनाथ

  • अगर वीर सावरकर के विचारों को कांग्रेस ने अपनाया होता, तो देश विभाजन की त्रासदी से बच जाताः योगी

लखनऊ। देश की आजादी में वीर सावरकर का बलिदान भुलाया नहीं जा सकता। आज भी उनके विचार राष्ट्रवादी युवाओं के लिए मार्गदर्शन का कार्य करते हैं। सदी में सावरकर से बड़ा लेखक, क्रांतिकारी पैदा नहीं हुआ, जिसने दो बार काले पानी की सजा भुगती हो। यह बातें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को वीर सावरकर की जयंती पर लेखक उदय माहुरकर एवं चिरायु पंडित की सह लिखित पुस्तक ‘वीर सावरकर जो भारत का विभाजन रोक सकते थे और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा दृष्टि‘ के लोकार्पण अवसर पर कही। लोकार्पण कार्यक्रम का आयोजन सावरकर विचार मंच, प्रभात प्रकाशन व राष्ट्र गाथ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वीर सावरकर को सेल्युलर जेल की उस छोटी सी कोठरी में रखा गया था, जहां उनके सामने की कोठरी में रोज किसी न किसी क्रांतिकारी को फांसी दी जाती थी। उन्हें शारीरिक यातनाओं के साथ-साथ मानसिक यातनाएं भी दी गई। सावरकर ने दीवार पर नाखून, बर्तन या जो भी मिल जाए, उससे लिखा और उसे कंठस्थ भी किया। इन सब बातों को सोचकर उनके संघर्षों का अंदाजा लगाया जा सकता है। इतिहास को भुलाया नहीं जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सावरकर जी जब हिंदू महासभा से जुड़े तो उनके साथ मेरे दादा गुरू महंत दिग्विजय नाथ भी हिन्दू महासभा से जुड़े। वह उस समय संयुक्त प्रांत के अध्यक्ष थे बाद में महाराज जी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए थे। गोरक्षपीठ की ओर से सावरकर जी को गोरखपुर आमंत्रित किया गया था और एक कार्यक्रम हुआ था। लेकिन देश आजाद होने के बाद भी लंबे वक्त तक सावरकर जी को उनका अपेक्षित सम्मान नहीं मिल सका। आज भी सावरकर जी के विचार सभी के लिए प्रासंगिक हैं। सावरकर एक असाधारण व्यक्ति थे, जिसे 50 सालों के बाद भी याद किया जाए वह साधारण नहीं हो सकता है। इसके अलावा मुख्यमंत्री सावरकर जी जुड़ी और भी बातें कहीं।

सावरकर युग का फिर से आरंभ हो चुका हैः उदय माहुरकर

इससे पहले, केंद्रीय सूचना आयुक्त उदय माहुरकर ने कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से देश में राष्ट्रवाद उजागर रहेगा। सावरकर जी का बलिदान एक क्रांतिकारी के रूप में अविस्मरणीय रहेगा। सावरकर जी ने देश का विभाजन रोकने के लिए प्रयास किए। उन्होंने कहा कि अगर हम उस वक्त से गांधी जी को राष्ट्रपिता मानते हैं तो सावरकर जी को राष्ट्रीय सुरक्षा के पितामह के रूप में स्वीकारना होगा। राम मंदिर का बनना, अनुच्छेद 370 हटना और योगी का दोबारा मुख्यमंत्री बनना, राजनीति में फिर से सावरकर युग की शुरुआत कहा जा सकता है।

युवा लेखक शिक्षाविद् चिरायु पंडित ने कहा कि बड़ी मेहनत और शोध के बाद इस पुस्तक की रचना की गई। इससे सावरकर जी के विषय में यदि कुछ भ्रांतियां रहीं भी होंगी तो दूर हो जाएंगी। कार्यक्रम संयोजन प्रभात कुमार और पियूष कुमार ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत में सीएम योगी आदित्यनाथ का स्वागत अभिनंदन किया। इस अवसर पर कार्यक्रम सह संयोजक डॉ अजय दत्त शर्मा, कार्यक्रम प्रभारी डॉ महेश दत्त शर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

Lahar Ujala

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