सीजीएचएस लखनऊ में संबद्ध डेंटल केयर क्लिनिक पर कार्रवाई और दागी डॉक्टर के द्वारा संचालित दूसरा सीजीएचएस क्लीनिक?

लखनऊ।
राजधानी में सीजीएचएस में बड़ा घोटाला नियम कानून को तक पर रख दागी डॉक्टर को सीजीएचएस से संबद्ध डेंटल केयर क्लिनिक टेढ़ी पुलिया लखनऊ को हटा दिया गया था और उसी डॉक्टर को उसी पंजीकरण नंबर से उदयगंज में बून डेंटल क्लीनिक पर सीएचएस में पैनल कर दिया गया
मामला लखनऊ के उदयगंज का है जहां पर डॉक्टर काजी सज्जाद द्वारा संचालित डेंटल केयर क्लिनिक टेढ़ी पुलिया में वित्ततीये अनिमित्यया ( फाइनेंसियल फ्रॉड )को देखते हुए निदेशक डॉ राजश्री द्वारा बड़ी कार्यवाही की गई और उसे सीजीएचएस पैनल से हटकर लगभग 2 लाख रुपये की रिकवरी भी की गई। लेकिन इस डॉक्टर को उदयगंज स्थित बून डेंटल क्लिनिक में सीजीएचएस पैनल में शामिल कर लिया गया यह कैसा अजब गजब नियम है की एक डॉक्टर एक क्लीनिक पर अनियमिताओं के कारण दोषी पाया जाता है और उस पर कार्यवाही होती है और उसी डॉक्टर द्वारा संचालित दूसरी क्लिनिक को (दोनों क्लिनिक का स्वामी और प्रैक्टेसिंग / trating सेम है )सीजीएचएस से संबंध कर दिया जाता है और वह सेवानिवृत कर्मचारियों को देखता है और उपचार भी देता है बड़ा सवाल तो यहां है कि टेढ़ी पुलिया स्थित डेंटल केयर क्लीनिक पर कार्यवाही के बाद भी डॉक्टर काजी सज्जाद द्वारा सेवानिवृत कर्मचारियों को उपचार दे रहा था कार्रवाई होने के बाद सीजीएचएस द्वारा विभागीय संचालित डिस्पेंसरी से रेफर आखिर कैसे हो रहा था ? और उसका बिल सीजीएचएस NHA के प्लेटफार्म पर जमा भी हो रहा था और जमा होने के उपरांत अपर निदेशक डॉ राजश्री द्वारा भुगतान कैसे किया गया ?फिर एक शिकायत हुई और अपर निदेशक डॉक्टर राजश्री द्वारा जांच कमेटी बनी और विभागीय कार्यवाही की गई आखिर इस व्यक्ति द्वारा संचालित बूंन डेंटल क्लिनिक को सीएचएस में पैनल कैसे कर दिया गया ? जब एक बार कार्रवाई हुई तो दूसरी जगह कैसे पैनल हो गया ?आखिर विभाग में शामिल होने और हटाने के नियम क्या है ?इस मामले को लेकर अपर निदेशक डॉक्टर राजश्री से बात की गई तो उन्होंने बताया कि 2 लाख रुपये रिकवर किए गए और कार्यवाही भी की गई फिर जब उनसे पूछा गया कि यह कैसी करवाई है कि उसे दूसरी जगह उदयगंज स्थित बून डेंटल क्लीनिक में सीजीएचएस से संबंध कर दिया गया तो उन्होंने कहा कि ऊपर से आदेश थे सूत्रों के माने तो आदेश में कुछ और लिखा है लेकिन जब डॉक्टर काजी सज्जाद दोषी हो गए तो आखिर उन्हें ब्लैकलिस्टेड क्यों नहीं किया गया ?देखने की बात यह होगी कि आखिर इस तरह के डॉक्टर जो मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं और विभाग को गुमराह कर रहे हैं उन पर कार्यवाही क्यों नहीं।



